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Sunday, April 24, 2016


 चलना ही जिंदगी है(3) 
                                       इस सप्ताह के सुविचार -----


  • जिंदगी का शुक्रिया करें, इसे खूबसूरत पलों से सजायें.
  •  जीवन एक यात्रा है. समय - समय पर पड़ाव आते हैं. हर पड़ाव का अपना आनंद है.
  • जी भरकर मुस्कराइए . आपकी मुस्कराहट किसी अनजान के मन पर छाए गम के बादल भी हटाने की ताकत रखती है. .
  • कुछ नया करने से न डरें . नया काम भी आपको कुछ सिखाकर ही जाएगा.
  • अपने पंख खोलिए . देखिये आपको अपने बारे में और कई बातें पता चलेंगी. अपने मन की सीमाओं से परे चलिए. अभी कितनी नई मंजिलें आपका इन्तजार कर रही हैं.
  • कोई भी काम करने से पहले कठिन लगता है. करते -करते वह रफ़्तार पकड़ता है.बाद में वह कब ख़त्म हो जाता है, पता भी नहीं चलता . इसलिए काम करते रहिये, आप मंजिल तक पहुँच ही जाएँगे .

Friday, April 22, 2016



यह मेरी दिली इच्छा थी कि बच्चों के लिए ऐसी गीत लिखूं जिन्हें संगीतबद्ध किया जा सके.काफी कड़ी मेहनत के बाद सन २०११ में मेरी पुस्तक ' ताक धिना धिन ' प्रकाशित हुई .इस पुस्तक में चित्र भी मैंने ही बनाए. मेरे मन के अनुसार बच्चों के लिए प्यारी पुस्तक बनी.
इस पुस्तक के पहले गीत का आनंद आप निम्नलिखित लिंक पर ले सकते हैं.
उषा छाबड़ा 
२२.४.१६

Wednesday, April 20, 2016

बच्चा बात नहीं मानता
जब भी कभी अभिभावकों से मिलना होता है तब कई बार वे यही कहते हैं , क्या करें बच्चा हमारी बात ही नहीं मानता  हम  कक्षा में बैठे हुए बच्चे के उठने - बैठने के ढंग , उसके बोलचाल के ढंग से आसानी से  उसके घर के तौर तरीकों के बारे में जान जाते हैं. बच्चा कक्षा में ऊँचे स्वर में बोलता है , अभद्र भाषा का प्रयोग करता है,  अक्सर मार पीट कर बैठता है - आदि आदतें  बच्चे के साथ- साथ उसके घर की संरचना के बारे  में भी बता देती हैं
ऐसा क्यों होता है कि बच्चा बात नहीं मानता बच्चा चाहे लड़का हो या लड़की  , वह यह अच्छी तरह जानता है कि मेरे माता- पिता मुझे बहुत चाहते हैं और मैं अपनी बात इनसे कैसे मनवा सकता हूँ जब बचपन में वह ज़िद करता है तो  माँ कह  देती है , “ चलो दिला देते हैं , क्या रुलाना !” बच्चा समझ जाता है कि रोने से माँ - पिताजी का दिल पिघल जाता है और वे उसकी बात मान लेते हैं अब वह अपनी बात मनवाने के लिए इस अस्त्र का प्रयोग करता है जब मनपसंद सब्जी नहीं बनी, तो वह रोने लगता है, “यह नहीं खाना “ , तो कई बार दादाजी या दादीजी या फिर पिताजी भी कह देते हैं कि चलो कुछ और बना दो , नहीं तो भूखा रह जाएगा जब ऐसा अक्सर होने लगता है तो बच्चा जिद करने लगता है और  हरी सब्जियों से दूर होता जाता है पौष्टिक भोजन न कर वह जंक फ़ूड की ओर अधिक आकृष्ट होता है और धीरे - धीरे वह मोटापे का शिकार होने लगता है कई बार अभिभावक यह कहते हैं कि मैम आप ही समझाइए, हमारी बात तो मानता ही नहीं. लेकिन आदतें तो इतनी जल्दी नहीं बदलती
इसी तरह रोज एक नियमित ढंग  से पढ़ाई न करने पर भी बच्चे कक्षा में सही परिणाम नहीं दर्शातेजब अभिभावकों से बात की जाती है तो कहते हैं,  “क्या करें  बच्चा  बात नहीं मानता” यह नियमित पढने की आदत भी बचपन से होनी चाहिए एक नियत समय पर पढाई के लिए बैठना, एक नियत समय पर खेलने के लिए जाना, टीवी देखना भी बचपन से ही नियमबद्ध होना चाहिए जहाँ माता- पिता थोड़ी- सी ढील देने लगते  हैं , बच्चा हाथों से निकलने लगता है, धीरे धीरे पढाई में दूसरों से पिछड़ जाता है, फिर लाख कोशिश करने पर भी अच्छे अंक नहीं ला पाता  हर नियम बचपन से लागू करना चाहिए. कहते हैं न बचपन एक कच्चे घड़े के समान होता है . जैसा  उस पर डिज़ाइन बनाओगे, वैसा ही वह पकेगा
यहाँ तक तो आपने देखा कि बच्चे की इन आदतों से आपका अपना परिवार ही सिर्फ नुकसान झेल रहा है लेकिन जब यही बच्चा अपनी गलत आदतों से समाज को नुकसान पहुँचाने लगता है तो बात आगे बढ़ जाती है  जब गलत संगति में पड़कर वह झूठ बोलने लगता है, दूसरों पर हाथ चलाने लग जाता है, नशाखोरी करने लगता है , तो आंच दूसरों पर आने लगती है ऐसे ही छोटी उम्र में बच्चों को स्कूटी, बाइक या गाड़ी की चाभी मिल जाती है, तो वे सड़क के नियमों को तोड़ने लगते हैं बात न मानने की आदत के कारण सड़कों पर आए दिन अपना गुस्सा औरों पर निकालने लगते हैं , नतीजा यह कि अपने साथ- साथ दूसरों की ज़िन्दगी भी दांव पर लगा देते हैं छोटी उम्र में सही गलत की पहचान नहीं होती, माँ – पिता की बात मानने की भी आदत नहीं होती , इसलिए उसे समझ नहीं आती और गैर -ज़िम्मेदाराना हरकत कर बैठता है आजकल  आए दिन  सड़क पर होने वाले हादसों की ह्रदय विदारक खबरें सुनाई देती हैं
इन सब समस्याओं से निपटने के लिए अभिभावकों को सही समय पर बच्चों का मार्गदर्शन करना होगा, बच्चा बात नहीं मानता , कह देने भर से वे अपनी जिम्मेदारियों  से मुक्त नहीं हो सकते बच्चों के लिए जिस उम्र में जो सही है, उसे उतनी ही छूट मिलनी चाहिए बच्चों की बेमतलब की जिदों के आगे  घुटने टेक देने से बात हाथों से निकल जाती है बच्चों से बार- बार संवाद करना सही रहता है  बच्चों को हर समय मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है हर उम्र की अपनी समस्याएं होती हैं अतः मिल- बैठकर उसका निवारण करने में ही भलाई है बाद में यह कहना अच्छा नहीं लगता कि क्या करें बच्चा बात नहीं मानता !
उषा छाबड़ा

२०.४.१६ 

Monday, April 18, 2016


     
भीम बेटका 
साँची 

विश्व विरासत दिवस

आज की पीढ़ी अपने देश के दर्शनीय स्थानों को कम जानती है।आज विश्व विरासत दिवस है   । हम अपनी विरासत को तभी अच्छी तरह संभालेंगे, जब हम उसे जानेंगे ।

आज मैं अपने भोपाल दौरे के अनुभव को आपके साथ साझा करना चाहती हूँ  सन २०१३ के मार्च के महीने में मैं सपरिवार भोपाल गई   तीन दिन का समय कैसे गुज़र गया , पता ही नहीं चला 
वहाँ का इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय श्यामला हिल्स की खूबसूरत पहाड़ियों पर करीब 200 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है  यहाँ बड़े बड़े प्रदर्शनी कक्षों मेंआदिवासियों के आवासों कोउनके बरतनरसोईकामकाज के उपकरण अन्न भंडार तथा परिवेश को हस्तशिल्पदेवी देवताओं की मूर्तियों और स्मृति चिह्नों से सजाया गया है। यहाँ का भ्रमण कर आप एशिया की जनजातीय विविधताओं को करीब से देख सकते हैं। यह अपने- आप में अनूठा है 

संध्याकाल  हमने  अपर लेक में नौका विहार का आनंद उठाया   

दूसरी जगह है साँची । बौद्ध धर्मावलंबियों का यह पावन तीर्थ एक टीले की तराई में स्थित है और बौद्ध स्मारकों के लिए प्रसिद्ध है। शांतिपवित्रताधर्म और साहस केप्रतीक सांची के स्तूप बेहद सुंदर हैं । सम्राट अशोक ने इस स्थान का निर्माण बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार हेतु कराया था। यहाँ पहुँचकर एक अजीब- सी शांति महसूस होती है. यहाँ ऑडियो गाइड  भी उपलब्ध हैं जिससे आप यहाँ के पूरे इतिहास को जान सकते हैं  

तीसरा स्थान है भीम बेटका  भीम बेटका भोपाल (मप्र) से कोई 50 किमी दूर है  यह एक पर्वतीय स्थल हैजहाँ बहुत सी प्राकृतिक गुफाएँ हैं  यहाँ की कोई 500 से अधिक गुफाओं में सैकड़ों प्रागैतिहासिक चित्र हैं  आदिमानवों ने गुफा की दीवारों पर विविध दर्शनीय चित्र अंकित किए थे  यहाँ के कुछ चित्र पचास हजार वर्ष पुराने हैं और जब आप यह सब अपनी आँखों से देखते हैं तो ऐसा लगता है कि आप अपने पुरखों को  कितने क़रीब से जान पा रहे हैं  अपनी जड़ों को इतनी नजदीक से देखना एक सपने के समान लगता है  भीम बेटका को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर भी घोषित किया जा चुका है  

 कुल मिलाकर यह यात्रा अच्छी रही क्योंकि अंत में बच्चों ने कहा कि ऐसी जगहें  हमें कितना ज्ञान स्वतः दे देती हैं  ऐसे स्थानों के बारे में याद करने की आवश्यकता नहीं है , यह तो अब हमारे मानसपटल पर छप चुकी हैं 

सच, भारत बहुत सुंदर है ! अपने बच्चों को इसके दर्शनीय स्थलों की सैर अवश्य कराएँ  अपनी धरोहर से बच्चों को अवगत कराएँ 
उषा छाबड़ा 

 १८.४.१६ 

Saturday, April 16, 2016




    चलना ही जिंदगी है(२) 
                                       इस सप्ताह के सुविचार -----
  • जिस प्रकार बगीचे में विभिन्न प्रकार के पेड़ - पौधे , जीव -जंतु होते हैं और यही विभिन्नता उसे सुंदर बनाती है, उसी प्रकार इस संसार में हर व्यक्ति अलग है, यही विभिन्नता संसार को विशिष्ट बनाती है . सबके काम करने का ढंग, सबकी सोच अलग है. सबको एक तराजू से क्यों तोलें?
  • निर्जीव वस्तुओं में अकड़ होती है , सजीव में नहीं.
  • परिवर्तन प्रकृति का नियम है. हम जो कल थे , वह आज नही हैं. आज के दिन भर के अनुभव ने हमें और परिपक्व बनाया , इसलिए परिवर्तन का स्वागत करें.
  • आपके जीवन का हर दिन एक खाली पन्ने के समान है, यह आपका है , इसे खूबसूरत रंगों से सजाइए . इसे सुंदर बनाइए .
  • कष्ट पूर्ण क्षणों में भी संयम बनाये रखना एक मुश्किल कार्य है, पर असंभव नहीं.!
  • दिल तो बच्चा है जी. बच्चे की तरह जीवन को खुलकर जीएँ , जिज्ञासु बनें.
      उषा छाबड़ा
       १६.४.१६ 




Friday, April 15, 2016

    रामनवमी की प्रासंगिकता
आज का  दिन श्री राम के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है. मन में कई बार यह प्रश्न उठता है कि क्या श्री राम कभी थे, क्या रामायण सिर्फ एक कथा है या सच्चाई ! क्या राम आज भी प्रासंगिक हैं!
राम एक ऐसे चरित्र हैं जिन्होंने हर दिल पर राज किया.चाहे  वे कहानी के पात्र रूप में हों या मानवीय  रूप में ईश्वर.
आज हर समय यही सुना जाता है कि राम राज्य की कल्पना न करो , तो फिर राम की पूजा क्यों ?  
राम एक ऐसे पात्र हैं  जिन्होंने हमारे सामने आदर्शों  की स्थापना की , कष्ट भरे जीवन में भी अपनी प्रतिज्ञा, अपनी मर्यादा को भंग नहीं होने दिया . उन्होंने अपने जीवन के विभिन्न उदाहरणों  द्वारा यही बताया कि असत्य की हमेशा हार होती है और सच्चाई की जीत . आज जब हमारा समाज  इतनी सामाजिक , राजनीतिक एवं पारिवारिक समस्याओं से गुजर रहा है , राम हमारे सामने एक ऐसा आदर्श उदाहरण प्रस्तुत  करते हैं जिससे मानवता में हमारी आस्था  बनी रह सके . हम चाहे राम के सभी गुणों को न अपना पाएं लेकिन फिर भी कुछ एक गुणों को धारण करके भी हम समाज को एक नई दिशा प्रदान कर सकते हैं. आज के सामाजिक मूल्यों के विघटन के दौर में राम सिर्फ धर्म विशेष के प्रतीक के रूप में नहीं , बल्कि मानवता के कर्णधार के रूप में देखे जाने चाहिए.  सिर्फ मूर्तिपूजा नहीं, बल्कि उनके दिखाए मार्ग पर चलने की आवश्यकता है .
उषा छाबड़ा


१५.४.१६ 

Saturday, April 9, 2016


चलना ही जिंदगी है  १

इस सप्ताह के सुविचार 


  • पंछी बन आसमान में उड़ने को जी चाहता है,

          पतंग बन हवा से गुफ्तगू करने को जी चाहता है, 
          नदी बन पहाड़ों से निकल बहने को जी चाहता है ,
          तितली बन फूलों की महक चुराने को जी चाहता है ,
           चाहतों की लम्बी सूची है क्या क्या लिखूँ - - - - - - --
           वास्तव में अब जीने को जी चाहता है। 



  • यह जीवन सुंदर है, जो पल जा रहा है, वह वापिस नहीं आएगा. इसलिए खुलकर जीएँ . मस्त रहें .



  • पहला सुख निरोगी काया. अच्छे स्वास्थ्य से बड़ा कोई धन नहीं.पौष्टिक खाएं, खुश रहें .



  • हर व्यक्ति का जीवन उसकी अपनी कर्मभूमि है, उसके अपने लक्ष्य हैं, उसके अपने रास्ते हैं. सफ़र खुद ही तय करना है. किसी से कोई तुलना नहीं.



  • आपकी राह में अवरोध उत्पन्न करने वाले आपको कमजोर नहीं, सशक्त बना रहे हैं, इसलिए उनका आभार जानिये.

Thursday, April 7, 2016

आज 'हिमप्रस्थ ' पत्रिका में मेरी एक कहानी प्रकाशित हुई. इतने वर्षों से शिक्षण के क्षेत्र से जुड़ी होने के कारण ऐसी कई  कहानियाँ बन पड़ती हैं जो वास्तविक रूप से घटित हुई हैं. ऐसी ही एक कहानी है  'परिवर्तन '.
७.४.१६