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Wednesday, September 30, 2015

मित्रोँ
इस बार मेरी आवाज़ यानी उषा छाबड़ा की आवाज मेँ सुनिए यह कहानी
मित्रो
मेरी आवाज में रिकॉर्ड की हुई कहानी सुनिए
मित्रो
इस वीडिओ को अपने बच्चों को दिखाएं और उनकी मुस्कराह्ट का आनंद लें.
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A story of Intelligence
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संघर्ष बलिदान और तपस्या से
पथ हमारा आलोकित हुआ
स्वतंत्रता का बिगुल बजा
भारत हमारा आज़ाद हुआ
सोच नई आशा नई
नए विश्वास का सृजन हुआ
बुलन्दियां छुए मेरा भारत
जन जन का यह गान हुआ.
उषा छाबड़ा 

बच्चों की दुनिया के कैसे अनोखे रंग 
सपने रंगीन देख रह जाएँ सब दंग 
बच्चों से हो लें तो दिल न होगा तंग 
खुशियों को बाँटे चलो मिलकर हम संग.

  उषा छाबड़ा 
      ब चिड़िया ने धौंस दिखाई

छत पर बैठा था एक बन्दर
उछल कूद कर रहा था जमकर। 
तभी अचानक इक चिड़िआ आई 
उसे देख वह खूब मुस्काई।
बन्दर को बात समझ न आई
बन्दर ने उसे आँख दिखाई।
चिड़िया कौन सी कम थी भई
चिड़िया ने भी धौंस दिखाई।
बन्दर को फिर गुस्सा आया
पत्थर उठा चिड़िया को मारा।
चिड़िया झट से उड़कर भागी
बन्दर से जो उलझी रानी।
बेमतलब जो लोग उलझते
ऐसे ही मुँह की खाते ।
सदा करो सबका सम्मान
कभी न सहना पड़ेगा अपमान।
via Usha Chhabra
       चलो समझ लें बच्चोँ से हम ।


बच्चोँ के मन की बात निराली
इस घर बसती सिर्फ हरियाली
प्यार का पौधा खिलता हरदम
नफरत को यह न लेने दे दम
प्रेम रस से यह सराबोर
सुरभि फैले इसकी चहुँ ओर
कैसे रखें यूँ निश्छल मन
चलो समझ लें बच्चोँ से हम ।
उषा छाबड़ा
कन्हैया
नन्हे कन्हैया छोटी दंतिया दिखाए
पग घुंघरू बजाए प्यारी मुरली सुनाये।
मोर पंख मस्तक पर सुन्दर सजाये
दूध दही सम्भालो मटकी फोड़न को आये 
कदंब के झूलों में वृन्दावन की गलियों में
कन्हैया को ढूँढ़ते माँ यशोदा खूब बौराए।
गोवर्धन उठाने को गोपियों संग महारास को
कालिया के मर्दन को कंस के संहार को
गीता के पाठ को घर घर गुंजाने को
कन्हैया छिप छिप के आये।
कन्हैया मंद मंद मुस्काये
कन्हैया जग में हैं आए
कन्हैया कण कण समाये।

उषा छाबड़ा