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Sunday, July 9, 2017

My story in Balsahitya ki Dharti





Friday, June 30, 2017

My writings in Setu magazine

मुझे यह साझा करते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि सेतु: पिट्सबर्ग, अमेरिका से प्रकाशित अंतरराष्ट्रीय द्वैभाषिक मासिक पत्रिका के वार्षिकांक में मेरा यात्रा वृत्तांत एवं कुछ लघुकथाएँ  प्रकाशित हुई हैं। इन्हें  आप निम्लिखित लिंक पर पढ़ सकते हैं।


http://www.setumag.com/2017/06/seven-sisters-travelogue.html
http://www.setumag.com/2017/06/Usha-Chhabra-Laghukatha.html

Monday, June 26, 2017

E book Tak Dhina Dhin


मुझे यह बताते  अत्यंत आनंद हो रहा है कि  मेरे द्वारा लिखी गई पुस्तक ताक  धिना दिन की   इ बुक भी  सबको उपलब्ध हो पाएगी।

https://www.amazon.in/dp/B07379C262

storytelling during summer vacations



गर्मी की छुट्टियों में इस बार कई जगह कहानियाँ सुनाने का मौका मिला।  ऑक्सफ़ोर्ड बुक स्टोर के साथ साथ नेशनल बाल भवन , वंडररूम और CEHRO जैसी संस्थाओं में भी बच्चों को कहानियाँ  सुनाई गईं।  








Thursday, May 18, 2017

मंथन

मंथन
कई बच्चे अपनी कॉपी बड़ी सफाई से रखते हैं।  उनके पृष्ठ मुड़े नहीं होते , उनका हर अक्षर सधा हुआ होता है। काम सफाई से किया होता है। जिस तरह कक्षा में समझाया गया होता है , अपेक्षित  उत्तर लिखा होता है।  उत्तर पूरे होते  हैं।  काम पूरा होता है।
कई बच्चों की कॉपियों का रख- रखाव अच्छा नहीं होता।  उनके पृष्ठ मुड़े -तुड़े होते हैं। कभी हल्दी का दाग दिखता हैं तो कभी कोई पन्ना भी बीच में से फटा  दिखता है।  काम सावधानी से नहीं किया होता।  बार -बार गलती करते हैं , उसे काट देते हैं, फिर आगे लिखते हैं , फिर कोई शब्द काट देते हैं।  काम में स्थिरता  नहीं  दिखती।  बार बार  शब्द गलत लिखते हैं।  कई बार अधूरा काम ही जांचने के लिए दे देते हैं।
 
 ऊपर दिए गए दोनों तरह की कॉपियाँ अकसर सामने आती हैं।  अपनी कक्षा में मैं  लगभग १५ बच्चों की कापियां  
 अच्छी श्रेणी में गिन  सकती हूँ ,लगभग  १० कॉपियाँ  ठीक -ठाक हैं , बहुत अच्छी नहीं  और बाकी कापियों का हाल    
 खराब है।
 कापियों को देखकर , जांचते समय कुछ बातें समझ में आती हैं कि 
 बच्चे के घर का वातावरण क्या है ? उसपर कितना ध्यान दिया जा रहा है ? गलती अगर बार- बार दोहराई जा रही है तो या तो बच्चे की समझ में नहीं रही या बच्चा  लापरवाही कर रहा है   और घर पर उसकी पढ़ाई  को देखने वाला   कोई  नहीं है।
छोटी ही उम्र से हमें बच्चों को साफ- सफाई के बारे में बताना चाहिए, यह उसकी आदत में शामिल हो जाना चाहिए।  उसकी यह आदत फिर कॉपियों  में भी दिखाई देगी। कई बच्चों की  लिखने की गति कम है और इसलिए कक्षा में काम पूरा नहीं कर पाते।  अभिभावक  को चाहिए कि  प्रतिदिन जब बच्चा घर जाए तो उसकी कॉपियाँ  देखे, उसकी गलतियों को समझे और  उनपर पर ध्यान दें।  जो गलतियां छोटी कक्षाओं में नजरअंदाज की  जाती हैं  ,  बड़े होकर वही  गलतियाँ  ठीक नहीं हो पाती हैं। 
कई बार पाया गया है कि  बच्चों को वर्णों और मात्राओं का सही ज्ञान बचपन में नहीं हो पाया इसलिए वे बड़े होकर भी कई छोटी छोटी गलतियां करते हैं और वही गलतियाँ बड़ा रूप ले लेती हैं। 
बच्चे से अगर यह उम्मीद की जाती है कि वह अच्छे अंक लाये , तो उसके लिए अभिभावक, छात्र और अध्यापिका के कार्य में सामंजस्य होना होगा।  अध्यापिका का मार्गदर्शन तभी कारगर सिद्ध  होगा , जब अभिभावक  बच्चे पर ध्यान देंगें
अपने बच्चों के लिए समय देना बहुत ही आवश्यक है। समय रहते बच्चे की मदद करें। सीढ़ी एक बार में नहीं चढ़ी जाती , उसके एक- एक पायदान  पर चढ़ते  हुए ही ऊँचाई पर पहुँचा  जा सकता है।

उषा छाबड़ा

Wednesday, May 17, 2017

My interview published by Tell A Tale


Please read my interview at the given link , published by Tell A Tale

https://www.tell-a-tale.com/developing-creative-skills-among-children-meet-storyteller-and-writer-usha-chabbra/

My Books 'ताक धिना धिन ' at AMAZON.COM




जब मेरे बच्चे छोटे थे तब  जब भी  उनके लिए हिंदी की कविताओं की किताब ढूँढ़ती तो हर बार वही कविताएँ  मिलती जैसे' मछली जल की रानी है' और ' लाल टमाटर बड़ा मज़ेदार'।  कुछ नवीन नहीं दिखता था।  उन दिनों व्यस्तता के कारण स्वयं इन कविताओं को लिखने की बात मन में कभी नहीं आई।  काफी वर्षों बाद  गर्मी की छुट्टियों में मैंने कुछ कविताएँ  लिखीं और उन्हें गीतों  का रूप दिया गया। अपने विद्यालय के  संगीत विभाग के अध्यापकों से मिलकर हमने बहुत ही मेहनत कर  इस पुस्तक की सीडी भी बनाई। इसका चित्रांकन भी मैंने ही किया। जब पुस्तक 'ताक धिना धिन '  हाथ में आई तो अत्यंत ख़ुशी हुई। बच्चों को यह पुस्तक बहुत अच्छी  लगी।  इसका मुख्य  आकर्षण गीतों का संगीतबद्ध होना है।  
पहले यह सिर्फ प्रकाशक  के पास ही उपलब्ध थी , अब इसे आप  AMAZON.COM पर खरीद सकते हैं। 
http://www.amazon.in/dp/B0719KB81L
http://www.amazon.in/dp/B071VP88F7



Tuesday, May 9, 2017

My Interview At RadioplaybackIndia

Dear friends
I feel really honoured today to have my interview, taken by Mr. Sajiv Sarathie, broadcast on radioplaybackindia.com, a leading Hindi blog in podcasting. Mr. Sarathie is a connoisseur of the Hindi Language and Literature. He has carved a niche for himself as a Hindi poet, writer and lyricist.
Special thanks to Anurag Sharma ji without whose support this would not have been possible.
Pl listen the interview at the following link .
बोलती कहानियाँ में आज, उषा छाबड़ा (Usha Chhabra) से वार्ता कर रहे हैं, रेडियो प्लेबैक इंडिया के सजीव सारथी (Sajeev Sarathie)
http://radioplaybackindia.blogspot.com/…/Usha-Chabra-Interv

Monday, May 1, 2017

My interview at Setu magazine

ज़िन्दगी एक पहेली है और हम इसे समझते और बूझते ही रह जाते हैं। चलना ही ज़िन्दगी है, मैं सोचकर आगे बढ़ती रही ।मेरे जीवन के अब तक के अनोखे सफर के बारे में सेतु पत्रिका हेतु अनुराग जी द्वारा लिया गया साक्षात्कार आप तक पहुंचा, इसके लिए मैं उनका दिल से शुक्रिया अदा करती हूं। इसे आप निम्नलिखित लिंक पर पढ़ सकते हैं।http://www.setumag.com/2017/05/Usha-Chhabra-Interview.html

Poem बस यूँ ही याद आ गए


मेरी कविता  ----बस यूँ ही याद आ गए

http://www.setumag.com/2017/04/Usha-Chabara-Poem.html


Monday, February 20, 2017

बढ़ते कदम - एक प्रयोग

                                           बढ़ते कदम  - एक प्रयोग

बच्चे हिंदी की किताबें नहीं पढ़ते- जब भी अभिभावक मुझसे मिलते, यही शिकायत करते। इस बार मैंने कुछ अलग सोचा। मैं अपने घर से बाल भारती पत्रिका के कुछ अंक और कुछ अपने संग्रह से किताबें घर से लेकर गई  और कक्षा में  बच्चों के सामने रख दीं।  बच्चों को बताया कि  ये सब मेरी किताबें हैं  और पूछा  कि इन्हें कौन पढ़ना चाहता है।  कुछ बच्चों ने हामी भरी और किताबें ले लीं।  मैंने इन्हें घर ले जाने के लिए दे दीं । अगले दिन  कुछ बच्चों ने आकर बताया कि उन्होंने  उन किताबों में से  कहानियाँ  पढ़ी हैं । एक  बच्चे को मैंने कहानी सुनाने  को कहा।  जब उसने कहानी सुनाई तो  सबको कहानी  बहुत अच्छी  लगी।  अब कुछ और बच्चे भी मुझसे किताबें माँगने  लगे।  अब मुझे भी उन्हें देखकर आनंद आने लगा।  अब तो कक्षा में होड़ -सी शुरु हो गई  कि  आज कौन कहानी सुनाएगा।  धीरे- धीरे अब कक्षा के बच्चे अपने घर में  रखी किताबें भी लाने लगे।  कक्षा में बच्चे अब इंतज़ार करते हैं कि  आज मैम  किसे मौका देंगी।  मैंने उनसे पूछा कि  उनका अनुभव कैसा रहा। बच्चों ने बताया कि  जब हम पुस्तकालय से  हिंदी की किताबें लेकर जाते हैं तो किताबें पढ़ने का अधिक मन नहीं करता लेकिन जब आपने अपनी किताबें दीं तो उसे पढ़ने  अहसास अलग था। उन्हें पकड़ते ही आपकी बातें याद आतीं और  पढ़ने का अधिक मन करता। कक्षा में उन कहानियों को सुनाने का अलग आनन्द है।
एक बार बच्चों को किताबें पढ़ने की रुचि जागृत हो जाएगी , तो वे अवश्य ही अब पुस्तकालय से भी किताबें पढ़ेंगे । ' बढ़ते कदम  ' यह एक छोटा- सा प्रयोग था और  आशा  है आने  वाले दिनों में इसके परिणाम और बेहतर होंगे।  समय- समय पर   कक्षा के अनुसार अपने प्रयोग करते रहने चाहिए। बच्चों को खुश देखकर मन आनंदित हो उठता है। 
उषा छाबड़ा 
20.2.17 

Sunday, January 29, 2017

storytelling at Bhiwani

भिवानी के विद्यांतरिक्ष  स्कूल द्वारा आयोजित लिटरेचर फेस्टिवल में मेरे द्वारा बच्चों को कहानियाँ सुनाई गईं।






लघु कथा 'पहला प्रेम पत्र '

प्रभात प्रकाशन की  पत्रिका  साहित्य अमृत में   मेरी लघु  कथा  'पहला प्रेम पत्र 

Thursday, January 26, 2017

जयपुर साहित्यिक उत्सव के आउटरीच कार्यक्रम


जयपुर साहित्यिक उत्सव के आउटरीच कार्यक्रम के तहत  प्रथम बुक्स के सौजन्य से मुझे जयपुर के छः विद्यालयों में कहानियां सुनाने का मौका मिला।  इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए आप नीचे दिए लिंक पर देख सकते हैं।