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Monday, November 13, 2017

KHEL SHORT STORY



Dear Friend
You can listen the audio of this story at the given link
https://radioplaybackindia.blogspot.in/2017/11/audio-book-Khel.html

खेल
आज मोनू उदास बैठा है।  बारबार रूठी निगाहों से चीनू को देख रहा है , पर चीनू को तो इस बारे में कुछ पता ही नहीं।  वह तो बस अपना काम किए जा रही है।  हुँ..  बड़ी आई।  बड़ी हुई तो क्या हुआ ? मैं तो उससे बात भी नहीं करूँगा  मोनू  चीनू को देखते हुए मन ही मन बोला।
पाँच मिनट  बीत गए।   चीनू अब भी उसकी तरफ नहीं देख रही। मोनू  से अब रहा नहीं जा रहा।  अपनी दीदी के पास आकर बैठ गया।  चीनू दीदी भी तो कम नहीं है।  तब से उसको देख रहा हूँ , पर कैसी बहन है , मेरे बारे में तो सोचती ही नहीं।  जाओ ,नहीं बात करता उससे।
फिर पाँच  मिनट बीत गए कभी वह रबर गिराए , तो कभी किताब के पन्ने  पलटे,  पर नहीं।  दीदी तो फिर भी उसकी तरफ नहीं देख रही।  कितनी अकड़ू है।   मोनू थोड़ा दूर जाता हैफिर पलट कर  जाता है।
दीदी , दीदी। ....
-क्या है ?
-दीदी , मेरे साथ खेलो  !
-नहीं , मेरे पास समय नहीं है।
-दीदी , रोज तो खेलती हो , थोड़ी देर मेरे साथ  खेल लो ,फिर अपना काम कर लेना।
-मैं नहीं खेलती तेरे साथ , तूने मुझे मारा है  !
-अरे , गलती हो गई  , अब नहीं करूँगा   गॉड प्रॉमिस।
-नहीं ,मुझे नहीं खेलना तेरे साथ।  स्कूल से बहुत काम मिला है मुझे।
-दीदी ,अच्छा माफ़ कर दो  , अब आगे  से ध्यान रखूँगा  , कभी नहीं मारूँगा। 
नहींमुझे नहीं खेलना।
-मांदेखो  !दीदी  मेरे साथ नहीं खेल रही , आप इससे बोलो कि  मेरे साथ खेले। 
"अरे बेटा  , देख भाई कह रहा  है , थोड़ी देर खेल ले। " माँ ने कहा।
नहीं माँ  , इसने मुझे मारा है , मैं नहीं खेलती इसके  साथ।
"क्या ? तूने दीदी को क्यों मारा ?  गन्दी बात की! " माँ  ने हैरानी से  पूछा 
मैंने कहा   गलती हो गई , अब नहीं मारूँगा  , देखो कान पकड़ता हूँ।  अब तो खेल ले न।
माँ चीनू से बोली , "बेटा  चल खेल ले  , चल एक काम कर , तू भी इसे मार ले। फिर तो तेरा गुस्सा ख़त्म हो जाएगा , देख उसका मन नहीं लग रहा है।
-नहीं , माँ  , यह हर बार ऐसा ही करता है , मैं नहीं मानती।पर मैं इसे नहीं मारूंगी।
तभी  मोनू  अपने गाल पर ही थप्पड़ लगाने लगा।
बस   दीदी  , अब तो माफ़ कर दो।  मेरा तुम्हारे बिना मन नहीं लग रहा  समझो न। 
-मेरा भी तो मन नहीं लग रहा था।  मैं तो बस तुम्हें तंग कर रही थी।
 दोनों सब भूल कर  खिलखिला के हँस  पड़े  
उषा छाबड़ा

Friday, November 10, 2017

Happy to share that my story got published in the esteemed magazine PUSTAK SANSKRITI published by National Book Trust .


Feeling happy to share that my story has got published in November '17 of Nandan magazine. 



Wednesday, November 1, 2017

live video on my journey as a teacher and storyteller



Dear friends,
I am really happy to share my first live telecast. Thank you all for your encouragement.Thank you Kahani Takbak and Ms. Shyamala Shanmugasundaram for your support 

Wednesday, October 4, 2017

Storytelling on the occasion of Gandhi Jayanti
गांधी जी के प्रेरक प्रसंग बच्चों और बड़ों ने ध्यान से सुने, उन्हें आत्मसात किया और आगे भविष्य में उनके दिखाए मार्ग पर चलने के लिए कृतसंकल्प हुए। 








Saturday, September 30, 2017

Saturday, September 2, 2017

परीक्षा की तैयारी

परीक्षा की तैयारी
बच्चों की अर्धवार्षिक परीक्षाएँ नजदीक रही हैं। इस समय बच्चे  एवं  अभिभावक दोनों तनाव में रहते हैं। बच्चे को तनाव नहीं ,सहारा दें। उसका मनोबल बढ़ाएँ।  
इस समय कुछ ध्यान देने वाली बातें इस प्रकार है -
   • समय सारिणी बनाकर हर विषय को उचित समय दें बीच- बीच में थोड़ा समय विश्राम के लिए   रखें।
   • परीक्षा  के लिए  दिए गए पाठ्यक्रम को ध्यान से देखें  और  उसके अनुरूप तैयारी कराएँ।
 • थोड़े समय में ज्यादा पढ़ लेने से बच्चा परीक्षा में सब कुछ याद नहीं ररख पाता। अतः समय- समय पर पढ़े हुए पाठ    
     का  एवं नियमित अभ्यास   कराएँ।
अच्छे उत्तर लिखने के  लिए बच्चे पाठ को बार- बार पढ़ें ताकि पाठ  पूरी तरह उन्हें समझ जाए।
कई बार देखा गया है कि परीक्षा देते समय बच्चे   पूरा पेपर नहीं कर पाते। कई प्रश्न छूट  जाते हैं , उन्हें प्रश्न पत्र बड़ा   
  लगता है। यह तभी होता है जब हम घर पर प्रश्नों के उत्तर लिख कर अभ्यास नहीं करते। लिखित अभ्यास कराएँ     
    इससे वर्तनी सम्बन्धी अशुद्धियाँ भी सामने जाती हैं और लिखने की गति भी बढ़ जाती है।   
बच्चे  को अगर कहीं  कुछ समझने में कठिनाई हो रही है तो उस वक्त तनाव में आयें।  थोड़ी देर के लिए उस विषय
   को छोड़ दें। बाद में फिर कुछ घंटों बाद उसे फिर उठाएँ या अगले दिन उस विषय को दोबारा  देखें। आप देखेंगे कि  
   अब   समझने में आसानी होगी।
•   संतुलित भोजन  आवश्यक है।  पेट अच्छी तरह भरा होने पर बच्चा मन लगाकर पढ़ता है।  जंक फ़ूड से बचें। 


 नियमित प्रयास, नियमित पठन , नियमित रूप से लेखन  अनिवार्य है। अंत में यही समझने की आवश्यकता है  कि  परीक्षा एक मापदंड है यह जानने के लिए कि बच्चे का कांसेप्ट कहाँ तक स्पष्ट है , किस  विषय पर पकड़ मज़बूत नहीं है , आगे आने वाले समय में हमारी तैयारी कैसी होनी चाहिए।