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Wednesday, August 17, 2016


                                                        स्टार
लघु कथा
हम सब बचपन से ही कहानियां गढ़ने में तेज़ होते हैं।  सभी कहानियां बुनते हैं।  एक छोटा बच्चा बैठे बैठे कभी  शेर बन जाता है तो कभी हाथी।  इतने बड़े हाथी  से चूहा बनने में में भी उसे एक सेकंड नहीं लगता। अभी हाल ही में एक बच्चा अपनी बस में बैठा हुआ अपने घर जा रहा था।  उसकी दोनों हथेलियों  में उसकी अध्यापिका ने एक- एक  स्टार  बना दिया था । बच्चा पूरे रास्ते अपने स्टार देखता रहा और उसके बारे में जाने कितनी बातें बुनता गया और अपने आस पास बैठे बच्चों को सुनाता गया ।  तभी किसी बच्चे ने उसकी हथेली  से अपनी हथेली रगड़ कर कहा ,"देखो मैंने तुम्हारा स्टार ले लिया" और वह बच्चा तो बस गुस्से से भर गया।  बार- बार अपना स्टार देखता फिर उसकी हथेली और फिर बोलता ,"नहीं मिला ,नहीं मिला।" बार बार वह फिर सबको अपना स्टार दिखाता , हँसता लेकिन फिर भी कहीं आशंका थी कि  कहीं इसने स्टार ले तो नहीं लिया।  उसके उस दिन के सफर में वह स्टार उसका साथी था।  कहानियों के उस छोटे जादूगर का हमसफ़र उसका छोटा सा स्टार !! उसे कैसे वह किसी को दे सकता था।
उषा छाबड़ा
१७.८ . १६  

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