Friday, February 16, 2018

 January 2018
Glimpse of my session with teachers  on Techniques of storytelling at CIET organised by Worldreader and SARD.








Theatre workshop with children of CEHRO . All the children were so active and receptive .It was really a fun filled session. 


प्रिय मित्रो 
आज आपके समक्ष एक और वीडिओ 'आ की मात्रा' का प्रयोग बनकर तैयार है। यह मेरे बड़े बेटे Piyush द्वारा बड़ी मेहनत से बनाया गया है। आशा है आप सबको पसंद आएगा। सभी इसे अधिक से अधिक शेयर करें ताकि बच्चों को इसका लाभ मिल सके। मेरे चैनल ushachhabra channel को subscribe करें।

https://www.youtube.com/watch?v=noyLsYg9M68&t=8s


 हस्तलेख से संबंधित वीडियो साझा कर रही हूं।आशा है आप सबको पसंद आएगा।
https://www.youtube.com/watch?v=V98_bBoPxoY&t=24s



मेरे द्वारा लिखी कहानी  'खूब मज़े करेंगे '

 https://youtu.be/QheZCronEi4


मेरे द्वारा लिखी कहानी  'वापसी '
https://www.youtube.com/watch?v=tOGE8gaHr30&t=4s
Stories .. stories ..... in the air!
Great Time spent at NDCHRC with children and adults at Vasant Kunj . Thank you Mr. Pratyush Kumar for the support .




November 2017
The theme of the Annual Day Production of D.P.S.Rohini was दिल्ली तारीख  के आइने में।
The script was written by me and children were trained accordingly. Very nicely presented by children.



Monday, November 13, 2017

KHEL SHORT STORY



Dear Friend
You can listen the audio of this story at the given link
https://radioplaybackindia.blogspot.in/2017/11/audio-book-Khel.html

खेल
आज मोनू उदास बैठा है।  बार- बार रूठी निगाहों से चीनू को देख रहा है , पर चीनू को तो इस बारे में कुछ पता ही नहीं।  वह तो बस अपना काम किए जा रही है।  हुँ..  बड़ी आई।  बड़ी हुई तो क्या हुआ ? मैं तो उससे बात भी नहीं करूँगा । मोनू  चीनू को देखते हुए मन ही मन बोला।
पाँच मिनट  बीत गए।   चीनू अब भी उसकी तरफ नहीं देख रही। मोनू  से अब रहा नहीं जा रहा।  अपनी दीदी के पास आकर बैठ गया।  चीनू दीदी भी तो कम नहीं है।  तब से उसको देख रहा हूँ , पर कैसी बहन है , मेरे बारे में तो सोचती ही नहीं।  जाओ ,नहीं बात करता उससे।
फिर पाँच  मिनट बीत गए. । कभी वह रबर गिराए , तो कभी किताब के पन्ने  पलटे,  पर नहीं।  दीदी तो फिर भी उसकी तरफ नहीं देख रही।  कितनी अकड़ू है।   मोनू थोड़ा दूर जाता है, फिर पलट कर आ जाता है।
- दीदी , दीदी। ....
-क्या है ?
-दीदी , मेरे साथ खेलो न !
-नहीं , मेरे पास समय नहीं है।
-दीदी , रोज तो खेलती हो , थोड़ी देर मेरे साथ  खेल लो ,फिर अपना काम कर लेना।
-मैं नहीं खेलती तेरे साथ , तूने मुझे मारा है न !
-अरे , गलती हो गई न , अब नहीं करूँगा ।  गॉड प्रॉमिस।
-नहीं ,मुझे नहीं खेलना तेरे साथ।  स्कूल से बहुत काम मिला है मुझे।
-दीदी ,अच्छा माफ़ कर दो न , अब आगे  से ध्यान रखूँगा  , कभी नहीं मारूँगा। 
- नहीं, मुझे नहीं खेलना।
-मां! देखो न !दीदी  मेरे साथ नहीं खेल रही , आप इससे बोलो कि  मेरे साथ खेले। 
"अरे बेटा  , देख भाई कह रहा  है , थोड़ी देर खेल ले। " माँ ने कहा।
नहीं माँ  , इसने मुझे मारा है , मैं नहीं खेलती इसके  साथ।
"क्या ? तूने दीदी को क्यों मारा ?  गन्दी बात की! " माँ  ने हैरानी से  पूछा ।
- मैंने कहा  न गलती हो गई , अब नहीं मारूँगा  , देखो कान पकड़ता हूँ।  अब तो खेल ले न।
माँ चीनू से बोली , "बेटा  चल खेल ले न , चल एक काम कर , तू भी इसे मार ले। फिर तो तेरा गुस्सा ख़त्म हो जाएगा , देख उसका मन नहीं लग रहा है।" 
-नहीं , माँ  , यह हर बार ऐसा ही करता है , मैं नहीं मानती।पर मैं इसे नहीं मारूंगी।
तभी  मोनू  अपने गाल पर ही थप्पड़ लगाने लगा।
- बस  न दीदी  , अब तो माफ़ कर दो।  मेरा तुम्हारे बिना मन नहीं लग रहा । समझो न। 
-मेरा भी तो मन नहीं लग रहा था।  मैं तो बस तुम्हें तंग कर रही थी।
 दोनों सब भूल कर  खिलखिला के हँस  पड़े । 
उषा छाबड़ा

Friday, November 10, 2017

Happy to share that my story got published in the esteemed magazine PUSTAK SANSKRITI published by National Book Trust .