Monday, June 26, 2017
Thursday, May 18, 2017
मंथन
मंथन
कई
बच्चे अपनी कॉपी
बड़ी सफाई से रखते हैं। उनके
पृष्ठ मुड़े नहीं
होते , उनका हर अक्षर सधा
हुआ होता है।
काम
सफाई से किया होता है।
जिस तरह कक्षा
में समझाया गया
होता है , अपेक्षित उत्तर
लिखा होता है। उत्तर पूरे
होते हैं। काम
पूरा होता है।
कई
बच्चों की कॉपियों
का रख- रखाव
अच्छा नहीं होता। उनके
पृष्ठ मुड़े -तुड़े
होते हैं। कभी
हल्दी का दाग दिखता हैं
तो कभी कोई पन्ना भी
बीच में से फटा
दिखता है।
काम सावधानी से नहीं किया होता। बार
-बार गलती करते
हैं , उसे काट देते हैं,
फिर आगे लिखते
हैं , फिर कोई शब्द काट
देते हैं। काम में
स्थिरता नहीं दिखती। बार
बार शब्द
गलत लिखते हैं। कई
बार अधूरा काम
ही जांचने के
लिए दे देते हैं।
ऊपर
दिए गए दोनों
तरह की कॉपियाँ
अकसर सामने आती
हैं। अपनी
कक्षा में मैं लगभग
१५ बच्चों की
कापियां
अच्छी
श्रेणी में गिन सकती
हूँ ,लगभग १० कॉपियाँ ठीक
-ठाक हैं , बहुत
अच्छी नहीं और बाकी
कापियों का हाल
खराब
है।
कापियों
को देखकर , जांचते
समय कुछ बातें
समझ में आती हैं कि
बच्चे
के घर का वातावरण क्या है
? उसपर कितना ध्यान
दिया जा रहा है ? गलती
अगर बार- बार
दोहराई जा रही है तो
या तो बच्चे
की समझ में नहीं आ
रही या बच्चा लापरवाही
कर रहा है और
घर पर उसकी पढ़ाई
को देखने वाला
कोई नहीं
है।
छोटी
ही उम्र से हमें बच्चों
को साफ- सफाई
के बारे में
बताना चाहिए, यह
उसकी आदत में शामिल हो
जाना चाहिए। उसकी यह
आदत फिर कॉपियों में
भी दिखाई देगी।
कई बच्चों की लिखने
की गति कम है और
इसलिए कक्षा में
काम पूरा नहीं
कर पाते। अभिभावक को
चाहिए कि प्रतिदिन जब बच्चा
घर जाए तो उसकी कॉपियाँ देखे,
उसकी गलतियों को
समझे और उनपर पर
ध्यान दें। जो गलतियां
छोटी कक्षाओं में
नजरअंदाज की
जाती हैं
, बड़े
होकर वही गलतियाँ ठीक
नहीं हो पाती हैं।
कई
बार पाया गया
है कि बच्चों को
वर्णों और मात्राओं
का सही ज्ञान
बचपन में नहीं
हो पाया इसलिए
वे बड़े होकर
भी कई छोटी छोटी गलतियां करते हैं
और वही गलतियाँ बड़ा रूप
ले लेती हैं।
बच्चे
से अगर यह उम्मीद की
जाती है कि वह अच्छे
अंक लाये , तो
उसके लिए अभिभावक,
छात्र और अध्यापिका
के कार्य में
सामंजस्य होना होगा। अध्यापिका
का मार्गदर्शन तभी
कारगर सिद्ध होगा , जब
अभिभावक बच्चे
पर ध्यान देंगें
।
अपने
बच्चों के लिए समय देना
बहुत ही आवश्यक
है। समय रहते
बच्चे की मदद करें। सीढ़ी
एक बार में नहीं चढ़ी
जाती , उसके एक-
एक पायदान पर चढ़ते हुए
ही ऊँचाई पर
पहुँचा जा
सकता है।
उषा
छाबड़ा
Wednesday, May 17, 2017
My interview published by Tell A Tale
Please read my interview at the given link , published by Tell A Tale
https://www.tell-a-tale.com/developing-creative-skills-among-children-meet-storyteller-and-writer-usha-chabbra/
My Books 'ताक धिना धिन ' at AMAZON.COM
जब मेरे बच्चे छोटे थे तब जब भी उनके लिए हिंदी की कविताओं की किताब ढूँढ़ती तो हर बार वही कविताएँ मिलती जैसे' मछली जल की रानी है' और ' लाल टमाटर बड़ा मज़ेदार'। कुछ नवीन नहीं दिखता था। उन दिनों व्यस्तता के कारण स्वयं इन कविताओं को लिखने की बात मन में कभी नहीं आई। काफी वर्षों बाद गर्मी की छुट्टियों में मैंने कुछ कविताएँ लिखीं और उन्हें गीतों का रूप दिया गया। अपने विद्यालय के संगीत विभाग के अध्यापकों से मिलकर हमने बहुत ही मेहनत कर इस पुस्तक की सीडी भी बनाई। इसका चित्रांकन भी मैंने ही किया। जब पुस्तक 'ताक धिना धिन ' हाथ में आई तो अत्यंत ख़ुशी हुई। बच्चों को यह पुस्तक बहुत अच्छी लगी। इसका मुख्य आकर्षण गीतों का संगीतबद्ध होना है।
पहले यह सिर्फ प्रकाशक के पास ही उपलब्ध थी , अब इसे आप AMAZON.COM पर खरीद सकते हैं।
http://www.amazon.in/dp/B0719KB81L
http://www.amazon.in/dp/B071VP88F7
Tuesday, May 9, 2017
My Interview At RadioplaybackIndia
Dear friends
I feel really honoured today to have my interview, taken by Mr. Sajiv Sarathie, broadcast on radioplaybackindia.com, a leading Hindi blog in podcasting. Mr. Sarathie is a connoisseur of the Hindi Language and Literature. He has carved a niche for himself as a Hindi poet, writer and lyricist.
Special thanks to Anurag Sharma ji without whose support this would not have been possible.
Pl listen the interview at the following link .
I feel really honoured today to have my interview, taken by Mr. Sajiv Sarathie, broadcast on radioplaybackindia.com, a leading Hindi blog in podcasting. Mr. Sarathie is a connoisseur of the Hindi Language and Literature. He has carved a niche for himself as a Hindi poet, writer and lyricist.
Special thanks to Anurag Sharma ji without whose support this would not have been possible.
Pl listen the interview at the following link .
बोलती कहानियाँ में आज, उषा छाबड़ा (Usha Chhabra) से वार्ता कर रहे हैं, रेडियो प्लेबैक इंडिया के सजीव सारथी (Sajeev Sarathie)
http://radioplaybackindia.blogspot.com/…/Usha-Chabra-Interv
http://radioplaybackindia.blogspot.com/…/Usha-Chabra-Interv
Monday, May 1, 2017
My interview at Setu magazine
ज़िन्दगी एक पहेली है और हम इसे समझते और बूझते ही रह जाते हैं। चलना ही ज़िन्दगी है, मैं सोचकर आगे बढ़ती रही ।मेरे जीवन के अब तक के अनोखे सफर के बारे में सेतु पत्रिका हेतु अनुराग जी द्वारा लिया गया साक्षात्कार आप तक पहुंचा, इसके लिए मैं उनका दिल से शुक्रिया अदा करती हूं। इसे आप निम्नलिखित लिंक पर पढ़ सकते हैं।http://www.setumag.com/2017/05/Usha-Chhabra-Interview.html
Poem बस यूँ ही याद आ गए
मेरी कविता ----बस यूँ ही याद आ गए
http://www.setumag.com/2017/04/Usha-Chabara-Poem.html
Subscribe to:
Posts (Atom)






