Sunday, October 18, 2015
Wednesday, October 14, 2015
नवरात्र का सुन्दर समय है आया
लोगों को यह खूब है भाया।
नौ रूपों में पूजी वह जाती
देवी भरपूर सम्मान है पाती।
बड़ी लगन से सब पूजा करते
कई तो नित उपवास भी रखते।
घर पर सात्विक भोजन बनता
तन मन सबका इसमें रमता।
पूजें अपने घर की लक्ष्मी
शक्ति की जो है प्रतिलिपि ।
भेदभाव उसे क्यों सहना पड़ता
रात दिन उसे क्यों घुटना पड़ता।
सम्मान की है वह भी हकदार
गले लगाएं उसे बारम्बार।
सर्वगुणों से उसे करें संपन्न
सब मिल कर हम करें यह प्रण।
उषा छाबड़ा
लोगों को यह खूब है भाया।
नौ रूपों में पूजी वह जाती
देवी भरपूर सम्मान है पाती।
बड़ी लगन से सब पूजा करते
कई तो नित उपवास भी रखते।
घर पर सात्विक भोजन बनता
तन मन सबका इसमें रमता।
पूजें अपने घर की लक्ष्मी
शक्ति की जो है प्रतिलिपि ।
भेदभाव उसे क्यों सहना पड़ता
रात दिन उसे क्यों घुटना पड़ता।
सम्मान की है वह भी हकदार
गले लगाएं उसे बारम्बार।
सर्वगुणों से उसे करें संपन्न
सब मिल कर हम करें यह प्रण।
उषा छाबड़ा
Sunday, October 11, 2015
समाचार पत्र खोलते ही पहले पन्ने पर ऐसे कई समाचार दिखाई दे जाते हैं कि समझ नहीं आता इंसान को आखिर हो क्या गया है. सभी को उसी ईश्वर ने बनाया है सभी में एक ही लौ है.. फिर इतनी असहिष्णुता क्यों है ? मानवता का रास्ता भूल हम पथभ्रष्ट क्यों हो रहे हैं? इस वक्त आवश्यकता है सिर्फ अपने आपको स्थिर रखने की । संयम की।
जश्न मानवता का एक जुट हों मनाएं
चलो सब एक हो नया गीत गुनगुनाएं
प्रेम के संदेश को जन जन में फैलाएं.
..
Thursday, October 1, 2015
अहिंसा के पुजारी को शत शत नमन.
यह तस्वीर सन २०१३ की है जब मैं अमरीका गई थी। यह गांधी जी की मोम से बनी मूर्ति है जो कि न्यूयॉर्क के टुसाद म्यूजियम में रखी है । तस्वीर खिंचाते वक्त जब मैंने गांधी जी की लाठी को पकड़ा तब मैंने कुछ अजीब सा महसूस किया. समझ नहीं आया पर यह अहसास जरूर हुआ कि इसमें कुछ प्रेरणा तो है. मन में प्रश्न उठा लोग क्यों और किस कदर इस महात्मा के पीछे चल पड़े थे जो लाठी हाथ में लिए पूरे देश का दौरा कर रहा था और इसका जवाब भी मुझे मिल गया था. अहिंसा के इस पुजारी को शत शत नमन.
गुरु कौन
जो जीवन के अनजान सफर पर बच्चे को डर का अहसास न होने दे
उसे पता भी न चलने दे कि वह कब इतनी दूर निकल आया है
वह अपने अंदर छिपे गुणों को पहचान पाये
उसमें इतना आत्मविश्वास भर दे कि वह किसी भी स्थिति में हिम्मत न हारे
जो ऊँचे ख्वाब देखने से न घबराये
जो उसे पूरा करने के लिए तत्पर रहे
जिसमें मानवता हो
उसे पता भी न चलने दे कि वह कब इतनी दूर निकल आया है
वह अपने अंदर छिपे गुणों को पहचान पाये
उसमें इतना आत्मविश्वास भर दे कि वह किसी भी स्थिति में हिम्मत न हारे
जो ऊँचे ख्वाब देखने से न घबराये
जो उसे पूरा करने के लिए तत्पर रहे
जिसमें मानवता हो
वह गुरु है जो भावी पीढी को सुंदर बनाता है।
उषा छाबड़ा
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